
चन्दौली चकिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर चकिया क्षेत्र में आयोजित तृतीय आयाम हिंदू सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का सशक्त माध्यम बना। सम्मेलन के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को संघ की विचारधारा, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के महत्व से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले सौ वर्षों से समाज को जोड़ने, राष्ट्र को सशक्त बनाने और सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का कार्य करता आ रहा है। शताब्दी वर्ष के दौरान संघ द्वारा सेवा, संगठन और संस्कार के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। तृतीय आयाम हिंदू सम्मेलन भी इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसमें बस्ती स्तर पर संवाद और वैचारिक जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया।

वक्ताओं ने सामाजिक समरसता, राष्ट्रभक्ति, युवाओं की भूमिका और सांस्कृतिक एकता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को संगठित रहने, अपने मूल्यों को पहचानने और राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है। सम्मेलन में युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं की सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान यह भी संदेश दिया गया कि संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आने वाले समय में चकिया सहित पूरे क्षेत्र में बौद्धिक वर्ग, सेवा कार्य, स्वच्छता अभियान, संपर्क अभियान और सामाजिक संवाद के अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण की भावना को और अधिक मजबूत किया जा सके।

सम्मेलन के समापन पर उपस्थित लोगों ने राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने और संघ के सेवा कार्यों में सक्रिय सहयोग देने का संकल्प लिया।














