राशन कार्ड घोटाला : चकिया ब्लॉक की अमरा ग्राम सभा में “गरीब नहीं, अपात्र हैं लाभार्थी”

सेक्रेटरी–सिस्टम की सांठगांठ से वर्षों से जारी फर्जीवाड़ा, शासन के आदेश बेअसर
चकिया (चंदौली)।
सरकार जहां एक ओर “अंत्योदय” और “गरीब कल्याण” का दावा कर रही है, वहीं चकिया विकासखंड की अमरा ग्राम सभा में उन्हीं दावों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। राशन कार्ड सत्यापन के नाम पर यहां वर्षों से फर्जीवाड़ा फल-फूल रहा है और गांव के वास्तविक गरीब परिवार आज भी सरकारी राशन के लिए ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
खोजी पड़ताल में सामने आया है कि गांव में तैनात सेक्रेटरी सौरभ चंद्र की कथित मिलीभगत से दर्जनों अपात्र लाभार्थी निर्बाध रूप से राशन योजना का लाभ उठा रहे हैं। हैरत की बात यह है कि शासन और जनपद स्तर से बार-बार जारी निर्देशों के बावजूद आज तक ग्राम सभा में राशन कार्ड सत्यापन की प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
अधिकारियों के आदेश ठेंगा, सेक्रेटरी की “सरकार” गांव में कायम
ग्रामीणों का आरोप है कि जनपद के अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों को गांव में तैनात सेक्रेटरी ने तांक पर रख दिया है। सत्यापन न होने के कारण अपात्र लाभार्थी खुलेआम सरकारी अनाज उठा रहे हैं, जबकि पात्र परिवारों के नाम सूची से बाहर हैं।
“फर्जीवाड़ा रोकना हमारी जिम्मेदारी नहीं” — सेक्रेटरी का सनसनीखेज बयान
सूत्रों के अनुसार जब राशन कार्ड फर्जीवाड़े पर सेक्रेटरी से जवाब मांगा गया तो उन्होंने चौंकाने वाला और गैर-जिम्मेदार बयान दिया—
“पंचायत चुनाव नजदीक हैं, राशन कार्ड में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं। हर गांव में अपात्र लोग राशन ले रहे हैं।”
इस बयान ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या पंचायत चुनाव कानून और सरकारी योजनाओं से ऊपर हैं? क्या गरीबों का हक सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है?
सरकार की साख पर बट्टा, सिस्टम की मिलीभगत उजागर
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक सेक्रेटरी की मनमानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की मिलीभगत का परिणाम है। यदि समय पर सत्यापन होता, तो अपात्र लाभार्थियों की पहचान कब की हो चुकी होती।
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गांव में तैनात कर्मियों और सिस्टम की “मिलीभगत की जीत” हो चुकी है, जिसमें गरीब हार रहा है।
सवाल जो प्रशासन से जवाब मांगते हैं
जब शासन ने सत्यापन के स्पष्ट आदेश दिए, तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ?
वर्षों से अपात्र लोग राशन कैसे उठा रहे हैं?
सेक्रेटरी के बयान पर प्रशासन कब कार्रवाई करेगा?
क्या पंचायत चुनाव के नाम पर गरीबों के हक की बलि दी जा रही है?
अब भी नहीं जागा प्रशासन तो चलता रहेगा फर्जीवाड़ा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि तत्काल निष्पक्ष जांच, भौतिक सत्यापन और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो अमरा ग्राम सभा में राशन कार्ड का यह घोटाला यूं ही चलता रहेगा और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं सिर्फ भाषणों तक सिमट कर रह जाएंगी।
यह गंभीर मामला चकिया ब्लॉक मुख्यालय अंतर्गत अमरा ग्राम सभा का है, जहां ग्रामीण अब जिलाधिकारी, डीएसओ और शासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।














