उत्तर प्रदेशचकियाचंदौली

चन्दौली चकिया: अमरा गांव में राशन महाघोटाला! शासनादेश की धज्जियां उड़ाते सेक्रेटरी सौरभ चंद्र….?

चकिया, चन्दौली।
केंद्र सरकार की गरीब-पोषक और जीवन रक्षक राशन कार्ड योजना को चकिया ब्लॉक के ग्राम अमरा में कथित रूप से लूट का जरिया बना दिया गया है। गांव में तैनात सेक्रेटरी सौरभ चंद्र पर खुलेआम आरोप है कि उनके संरक्षण में राशन कार्ड में संगठित फर्जीवाड़ा और घोटाला बदस्तूर जारी है।

शासनादेश, जिला प्रशासन और ब्लॉक अधिकारियों के आदेश गांव की चौखट पर ही दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। कागजों में सत्यापन पूरा, लेकिन धरातल पर आज भी अपात्र मलाई काट रहे हैं और असली गरीब भूख से जूझ रहे हैं।

सत्यापन नहीं, सिर्फ दिखावा — अफसरशाही का काला खेल!

सरकार द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों के अनुसार जिन राशन कार्डों को निरस्त किया गया था, उनकी पात्रता की दोबारा जांच अनिवार्य थी। मगर अमरा गांव में यह नियम रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया।

सवाल यह है कि….?

कट चुके राशन कार्डों पर पात्र लोगों का नाम आखिर क्यों नहीं जोड़ा गया?

किसके इशारे पर अपात्रों के कार्ड जिंदा रखे गए?

ब्लॉक स्तर पर हीलाहवाली, सेक्रेटरी की मनमानी चरम पर

राशन कार्ड सत्यापन अभियान में जानबूझकर ढिलाई, फाइलों को दबाना और आंकड़ों से खेल— यह सब अब साफ-साफ नजर आने लगा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सेक्रेटरी सौरभ चंद्र द्वारा अपात्र लाभार्थियों के कार्ड जानबूझकर नहीं काटे जा रहे, जिससे यह पूरा मामला अब घोटाले की श्रेणी में पहुंच चुका है।

आखिर सवाल उठता है—

क्या सेक्रेटरी किसी को बचा रहे हैं?
क्या गरीबों के हक का राशन बाजार में या गलत हाथों में पहुंच रहा है?

RTI बनेगी काल, छिपे आंकड़े आएंगे बाहर

अब सूचना के अधिकार के तहत वो दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिनसे पूरा काला चिट्ठा खुल सकता है। सेक्रेटरी सौरभ चंद्र को देना होगा जवाब—

अमरा गांव में कुल अन्तोदय (लाल) राशन कार्ड कितने हैं?

सत्यापन से पहले और बाद में अपात्र कितने लोग राशन उठा रहे थे/हैं?

किन वास्तविक, दलित, विधवा, बेसहारा और जरूरतमंद परिवारों को आज भी अन्तोदय कार्ड से वंचित रखा गया?

कितने नाम फर्जी पाए गए और कितने फाइलों में दबा दिए गए?

लीपापोती जारी, लेकिन विस्फोट तय!

सूत्रों की मानें तो पूरे मामले को रफा-दफा करने की कोशिश तेज है, लेकिन अब गांव-गांव चर्चा है कि यह आग सिर्फ अमरा तक सीमित नहीं रहने वाली।

ग्रामीणों और जागरूक लोगों का साफ अल्टीमेटम—

जब तक अपात्रों का राशन कार्ड नहीं कटेगा, यह लड़ाई रुकेगी नहीं।”

प्रशासन की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि—

क्या ब्लॉक स्तर के अधिकारी इस खेल से अनजान हैं?

या फिर गरीबों की थाली से छीना गया निवाला सिस्टम की साझी लूट बन चुका है?

अब या तो कार्रवाई होगी, या फिर यह घोटाला और बड़ा रूप लेगा।

अगली खबर में नाम, दस्तावेज और आंकड़ों के साथ होगा खुलासा।

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