अंधेरे में डूबा गांव! चकिया का गनेशपुर, आजादी के दशकों बाद भी गांव में नहीं पहुंची बिजली, लालटेन के सहारे जिंदगी

अरविंद सिंह मौर्य 8850543166
यूपी के चंदौली में एक गांव में अभी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं पहुंच सकी हैं। आजादी के 78 साल बीत जाने के बाद अभी भी इस गांव के कुछ लोग रात में रोशनी के लिए मोमबत्ती का सहारा लेते हैं। मामला चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गनेशपुर का है। यहां आजादी के बाद अब भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। गांव में करीब 500 घर हैं जो कई पूरा में है।इस बड़ी आबादी वाले गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है।

ग्रामीण 35 वर्षीय प्रदीप कुमार मौर्य बताते हैं कि देश की आजादी के 78 साल बाद भी गांव की सूरत नहीं बदल सकी है। गांव में विद्युतीकरण तो हुआ किन्तु अभी भी दर्जनों घर इसका लाभ नहीं उठा पाए। कई वर्ष पहले गांव में बिजली के खम्भे आए थे लेकिन अभी तक रोशनी नहीं आ सकी है। चुनाव के दौरान नेता आते हैं और बिजली व पानी की सुविधाएं देने का वादा करते हैं और वोट लेकर चलते बनते हैं ,आजतक नेताओं से सिर्फ आश्वसान ही मिल सका है।

“बिजली नहीं रहने से सूर्यास्त से पहले रसोई का काम निपटा लेते हैं” स्थानीय ग्रामीण महिला मीरा देवी” ।
“अब तो केरोसिन भी नहीं मिलता है. मोमबत्ती या रिचार्ज लाइट से किसी तरह काम चल रहा है” स्थानीय निवासी बहादुर मौर्य”।
“रिचार्ज लाइट से काम चलाना पड़ता है और उसे चार्ज करने के लिए दूर जाकर 10 रुपये देना पड़ता है, स्थानीय निवासी चंद्रिका बिंद, लक्ष्मण बिंद”

गांव के लोग कहते हैं कि बिजली न होने से रात में जंगली जानवरों का भय बना रहता है। लोगों को रात में उजाले के लिए सौर ऊर्जा व मोमबत्ती का सहारा लेना पड़ता है, विद्युतीकरण न होने से बच्चों की पढ़ाई पर भारी असर पड़ रहा है। कुछ साल पहले सरकार ने केरोसिन भी बंद कर दिया है, अब वैकल्पिक तरीके से उजाला करना पड़ता है।














