सोनभद्र में फैला अवैध कबाड़ कारोबारियों का मकड़ जाल ब्लैक को वाइट करने के साथ-साथ सरकारी राजस्व की प्रशासन के सहारे चोरी।

सोनभद्र में फैला अवैध कबाड़ कारोबारियों का मकड़ जाल ब्लैक को वाइट करने के साथ-साथ सरकारी राजस्व की प्रशासन के सहारे चोरी।

यहां आपको बता दे की सोनभद्र में कबाड़ का व्यवसाय इन दिनों खूब फल फूल रहा है। कबाड़ व्यवसायी कबाड़ के नाम पर सामानों को कटवा कर मोटा मुनाफा जोड़ने में लगे हुए हैं। कोने-कोने में हो रहे अवैध कबाड़ की दुकानों का संचालन से जिला प्रशासन अनजान या कुछ और है मामला
बिना दस्तावेज व बिना सत्यापन के संचालित हो रहे इन कबाढ़ की दुकानों में चोरी की गाड़ियों समेत तमाम तरह के चोरी के सामानों की खरीद बिक्री धड़ल्ले हो रही है। जिला मुख्यालय पर स्थित बड़े कबाड़ की दुकानों के साथ साथ छोटे और मझोले किस्म के कबाड़ियों की आजकल चांदी कट रही है। कबाड़ के आड़ में मोटरसाइकिल ऑटो पिकअप ट्रैक्टर जैसे बड़े वाहन भी रातों-रात स्क्रैप करके उनके महंगे पार्ट्स बाजार में भेज दिए जाते हैं. तो वहीं क्षेत्र में किसानों के हो रहे छोटी-मोटी चोरियों से इकट्ठा धातु के सामान केबल तार बिजली विभाग के तार सिचाई के उपकरण आदि को स्क्रैप करके कबाड़ी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं कहा जाता है कि कबाड़ियों का यह व्यवसाय प्रशासन की छत्रछाया में खूब फल फूल रहा है.

एक वायरल वीडियो में मधुपुर क्षेत्र के बट्ट स्थिति कबाड़ की दुकान का संचालक क्षेत्रीय प्रशासन को ₹1500 महीना हर 25 तारीख को देने की बात निर्भीकता से कहते नजर आ रहा है. वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही सोनभद्र पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठना शुरू हो गया है. वीडियो में दुकान संचालक द्वारा यह भी कहा गया है कि वह अकेला नहीं है क्षेत्र में जितने भी कबाड़ की दुकानें संचालित हो रही है हर एक दुकानों से महीना पुलिस चौकी पर जाता है. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि क्षेत्र में हो रहे अवैध कार्यों के लिए एक निश्चित धनराशि सेवा शुल्क के रूप में क्षेत्रीय प्रशासन लेती है बदले में बेधड़क होकर अवैध व्यवसाय चलाने के लिए सहयोग देती है।

नाम ना उजागर करने की शर्त पर बट्ट गाँव निवासी किसान बताते हैं कि शायद यही कारण है कि क्षेत्र में हो रही छोटी-मोटी चोरियों को क्षेत्रीय प्रशासन द्वारा नजर अंदाज किया जाता है क्योंकि जब कबाड़ियों से प्रशासन का चोली दामन का साथ है। तो ऐसे में गरीब जनता की कौन सुनेगा चार दिन थाने के चक्कर लगाने से बढ़िया है कि 4000 का सामान नया खरीद लेते हैं। अपने कृषि उपकरणों की सुरक्षा करने के लिए कोई न कोई परिवार का एक व्यक्ति बारी-बारी से खेत पर ही सो जाता है।

तो वही सोनभद्र में कबाड़ का बिजनेस कोई छोटा बिजनेस नहीं है तमाम बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं में इस्तेमाल के लिए तमाम तरह के उपकरण भी जगह-जगह लगाए गए हैं जीसे कई बार चोरों के द्वारा नुकसान पहुंचाया गया है। सोनभद्र का अधिकांश भाग जंगल पहाड़ और पिछड़ा है, और इसकी सीमाएं चार राज्यों से सटी हुई है कबाड़ियों के द्वारा संरक्षण दिए हुए चोर उचक्के इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हुए दूसरे राज्यों से चोरी किए हुए वाहन व अन्य सामान पहले चोरी करते हैं फिर जगह-जगह पर फैले अवैध कबाड़ की दुकानों पर आसानी से चोरी का सामान कबाड़ में बेच देते हैं और चोरी का माल इन छोटे कबाड़ के व्यवसाईयों से होते हुए बड़े कबाड़ के व्यवसाईयों तक पहुंच जाता है फिर उसको बड़े व्यवसाययों द्वारा पचा लिया जाता है जिससे सरकार की बहुत बड़े राजस्व की क्षति भी होती है। आश्चर्य की बात यह है कि क्षेत्रीय प्रशासन को समय-समय पर अवगत कराने पर भी प्रशासन कभी सेल टैक्स का मामला तो कभी अन्य विभाग का मामला बात कर अपना पल्ला झाड़ लेती है।














