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निपुण योजना खुला पोल, बच्चों का भविष्य की ओर
मास्टर साहब लेते है वेतन, बच्चों को बढ़ाने के वजह करते है कीर्तन
प्राथमिक विद्यालय ईसाहुल का मामला।

चंदौली/ चकिया/

जनपद के चकिया  स्थित बीआरसी अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय इसहुल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शिकायत निस्तारण प्रणाली पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

परिषदीय विद्यालय में प्रधानाध्यापक व शिक्षकों की लेटलतीफी और पढ़ाई न होने की शिकायत एक समाजसेवी द्वारा आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कराई गई थी। लेकिन आरोप है कि बिना किसी जांच और बिना शिकायतकर्ता से संपर्क किए ही मामले का निस्तारण कर दिया गया।

कागजों में ‘सब ठीक’, जमीनी हकीकत उलट

सूत्रों के मुताबिक, विभागीय स्तर पर फाइलों में सब कुछ सामान्य दिखाकर शिकायत को बंद कर दिया गया, जबकि विद्यालय की वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरा निस्तारण विद्यालय के प्रधानाध्यापक के प्रभाव में किया गया। जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई और शिकायत को ‘फर्जी तरीके’ से निपटा दिया गया।

बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर

विद्यालय में नियमित पढ़ाई न होने से सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को उठाना पड़ रहा है। अभिभावकों में इसे लेकर गहरी नाराजगी है और वे इसे भविष्य के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं।



यदि शिकायतों का निस्तारण बिना सत्यापन और शिकायतकर्ता की सुनवाई के ही किया जाएगा, तो सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता कैसे बनी रहेगी?



ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

क्या आईजीआरएस अब सिर्फ कागजी खानापूर्ति का माध्यम बनता जा रहा है?

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