बिकापुर गांव में फर्जी कार्यों के सहारे सरकारी खजाने पर डाका…..?

मनरेगा में ग्रामीणो का ‘महाघोटाले’ का आरोप! पांच साल तक असली मजदूर रोजगार से रहे वंचित कागजों में फर्जी मजदुर का चलता रहा रोजगार
बिकापुर गांव में फर्जी कार्यों के सहारे सरकारी खजाने पर डाका
ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग
पत्रकार प्रशान्त कुमार की एक रिपोर्ट
चकिया, चंदौली। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। चकिया ब्लॉक के बीकापुर गांव में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान गांव मे धरातल पर वास्तविक मनरेगा मजदूरों को रोजगार से वंचित रखा गया, जबकि कथित रूप से फर्जी प्रधान के करीबी लोगों के नाम पर फर्जी कार्य दिखाकर सरकारी धन का भुगतान कराया गया।
गांव के जागरूक ग्रामीणों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया की कई विकास कार्य केवल सरकारी अभिलेखों में पूरे दिखाए गए, जबकि धरातल पर उनकी वास्तविक स्थिति अलग है।
उनका कहना है कि यदि पिछले पांच वर्षों में हुए सभी मनरेगा कार्यों, मस्टर रोल, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण और तकनीकी स्वीकृतियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
गांव के संभ्रांत लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय गोपनीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।
अब यह मामला प्रशासन के लिए भी परीक्षा बन गया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मनरेगा में हुए कथित भ्रष्टाचार पर बड़ा खुलासा हो सकता है और कई जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है!



