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पथरी के ऑपरेशन के बाद महिला की मौत, लक्ष्मी चेरिटेबल अस्पताल पर लापरवाही के गंभीर आरोप; कार्रवाई और मुआवजे की मांग…?

पत्रकार- प्रशान्त कुमार की एक रिपोर्ट

चकिया, चंदौली। चकिया क्षेत्र के नेवाजगंज निवासी अशोक कुमार ने लक्ष्मी चेरिटेबल अस्पताल पर इलाज में कथित लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन को शिकायती पत्र सौंपकर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण उनकी माता मालती देवी की पथरी के ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई।

शिकायती पत्र के अनुसार, 11 जुलाई 2026 को मालती देवी को गांव की आशा कार्यकर्ता संजू देवी के माध्यम से लक्ष्मी चेरिटेबल अस्पताल में लगभग 15 एमएम की पथरी के ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया गया था।

परिजनों का कहना है कि यह सामान्य ऑपरेशन था, लेकिन ऑपरेशन के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और समय पर उचित उपचार नहीं मिलने के कारण अस्पताल में ही उनकी मौत हो गई।
अशोक कुमार का आरोप है कि ऑपरेशन के समय कोई अभिभावक (गार्जियन) मौजूद नहीं था। साथ ही अस्पताल में योग्य सर्जन उपलब्ध नहीं था और इलाज में गंभीर लापरवाही बरती गई।

उनका यह भी आरोप है कि मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने उन्हें वाराणसी स्थित मैक्सवेल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया और वहां ले जाकर कथित तौर पर सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया। हालांकि परिजनों ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और शव लेकर वापस अपने गांव नेवाजगंज लौट आए। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस प्रशासन को दी गई।

पीड़ित परिवार का यह भी आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से नोटिस मिलने के बावजूद लक्ष्मी चेरिटेबल अस्पताल कथित रूप से बेसमेंट में संचालित किया जा रहा है। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई, अस्पताल की जवाबदेही तय करने और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।

अशोक कुमार ने बताया कि उनकी माता अपने पीछे तीन पुत्र और दो पुत्रियां छोड़ गई हैं। परिवार का एक पुत्र पहले ही दिवंगत हो चुका है। उनका कहना है कि यदि न्याय नहीं मिला और कार्रवाई नहीं हुई तो परिवार धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में थाना अध्यक्ष चकिया को भी प्रार्थना पत्र दिया गया है, हालांकि घटना के बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका।


अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

देखना यह होगा कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होती है और परिवार को न्याय व उचित मुआवजा मिलता है, या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में सिमटकर रह जाएगा।

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