उत्तर प्रदेशचकियाचंदौली

कागज में 79 मजदूर, जमीन पर सन्नाटा…….?

मनरेगा की महात्वाकाक्षी  योजना पर ‘फर्जी हाजिरी’ का खेल, इन्द्रपुरवा में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

चकिया/चंदौली/
गरीबों को गांव में रोजगार देने के उद्देश्य से संचालित केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना चकिया ब्लाक के इन्द्रपुरवा गांव में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोपों में घिरती नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना में वास्तविक मजदूरों को काम नहीं मिल रहा, जबकि कागजों में फर्जी मजदूरों की हाजिरी भरकर सरकारी धन का बंदरबाट किया जा रहा है।


ग्रामीणों के मुताबिक मनरेगा अभिलेखों में 79 मजदूरों के कार्य करने का विवरण दर्ज है, लेकिन जब गांव के लोगों ने कार्यस्थल का जायजा लिया तो मौके पर सन्नाटा पसरा मिला। आरोप है कि बिना कार्य कराए ही फर्जी मस्टररोल तैयार कर भुगतान निकाला जा रहा है। इससे गांव में आक्रोश फैल गया है।


ग्रामीणों ने दावा किया कि इस कथित खेल में केवल स्थानीय स्तर ही नहीं बल्कि ब्लाक के विभिन्न टेबलों तक कमीशन का जाल फैला हुआ है। महिला मेठ, रोजगार सेवक और अन्य जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा है कि फर्जी मजदूरों के खातों में भुगतान भेजने के बाद रकम वापस वसूली जाती है और पूरा नेटवर्क कमीशन के आधार पर संचालित होता है।


गांव के संभ्रांत लोगों ने बताया कि मनरेगा के पूर्व कार्यों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होती रही। अब ग्रामीणों ने खुलकर मोर्चा खोलने का फैसला लिया है। गांव में हस्ताक्षर अभियान चलाकर सोशल ऑडिट, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की तैयारी शुरू हो गई है।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द संज्ञान नहीं लिया तो मामला जिला स्तर से लेकर शासन तक पहुंचाया जाएगा। इधर गांव में चर्चा का विषय बना यह मामला मनरेगा की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।


ग्रामीणों के आरोप


कागजों में 79 मजदूरों की हाजिरी
कार्यस्थल पर नहीं दिखे मजदूर
फर्जी भुगतान कर सरकारी धन निकासी का आरोप
कमीशनखोरी का ब्लाक स्तर तक नेटवर्क
असली मजदूर रोजगार से वंचित


उठ रही मांग….


पूरे मामले की निष्पक्ष जांच
सोशल ऑडिट कराने की मांग
दोषियों पर एफआईआर व कार्रवाई
मनरेगा भुगतान की जांच


चकिया ब्लाक के इन्द्रपुरवा गांव का मामला अब ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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