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भटवार कला में समय से नहीं खुलता राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय, डॉक्टरों की मनमानी से मरीज परेशान

संवाददाता- प्रशान्त कुमार की रिपोर्ट

चकिया/चंदौली

चकिया तहसील क्षेत्र के भटवार कला गांव में स्थित राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है। चिकित्सालय के समय से न खुलने और डॉक्टरों की मनमानी के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चिकित्सालय का निर्धारित समय सुबह 8 बजे है, लेकिन डॉक्टर और कर्मचारी 10 बजे के बाद आते हैं और 1-2 बजे ही चले जाते हैं। कई बार मरीज घंटों इंतजार कर वापस लौटने को मजबूर होते हैं।

गांव निवासी रामदेव, श्यामलाल और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में सरकारी एलोपैथिक अस्पताल नहीं है। ऐसे में लोगों की निर्भरता इसी आयुर्वेद चिकित्सालय पर है। बुखार, खांसी, जोड़ों के दर्द और अन्य सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए दूर-दराज से मरीज आते हैं, लेकिन ताले लटके मिलने पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।

समय से साफ-सफाई न होने और डॉक्टरों की लापरवाही से अब अस्पताल का मुख्य गेट भी नही बन्द किया जाता जिसकी वजह से आवारा कुत्तों ने अस्पताल परिसर को अपना आशियाना बना रखा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ कर्मचारी अपनी मर्जी से ड्यूटी करते हैं। दवाओं की उपलब्धता भी न के बराबर है। जो दवाएं मिलती भी हैं वो भी समय से नहीं दी जातीं।

लोगों ने सीएमओ चंदौली और जिलाधिकारी से मांग की है कि…

चिकित्सालय में डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए। समय से ओपीडी शुरू हो और मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि गरीब ग्रामीणों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।

इस मामले में चिकित्सालय के प्रभारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका।

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