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चकिया सरकारी अस्पताल की कथित लापरवाही उजागर करने पर वीडियो हटाने के दबाव का आरोप, मामला गरमाया

यूट्यूबर ने लगाया खबर हटाने के लिए दबाव बनाने का आरोप, रिकॉर्डिंग होने का दावा


चंदौली/चकिया/


चकिया। जनपद चंदौली में सरकारी अस्पताल से जुड़े एक कथित लापरवाही के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अस्पताल में इलाज के दौरान कथित अनियमितता और लापरवाही से संबंधित खबर और वीडियो प्रसारित होने के बाद अब वीडियो हटाने के लिए दबाव बनाए जाने के आरोप सामने आए हैं। मामले को लेकर सोशल मीडिया और पत्रकारिता जगत में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

यूट्यूब चैनल संचालक मयंक ने आरोप लगाया है कि अस्पताल से जुड़े विवादित मामले पर प्रसारित वीडियो और समाचार को हटाने के लिए उन पर दबाव बनाया गया।


पत्रकार पर दबाव बनाने का आरोप

मयंक के अनुसार, पत्रकार कार्तिकेय पांडेय ने उनसे संपर्क कर वीडियो हटाने की बात कही। आरोप है कि बातचीत के दौरान संबंधित डॉक्टर के साथ व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक संबंधों का हवाला देते हुए खबर को हटाने का अनुरोध किया गया।

मयंक का कहना है कि यदि कोई खबर तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी है तो उसे हटाने के लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों के विपरीत है।


हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और कार्तिकेय पांडेय का पक्ष प्राप्त होना शेष है।

सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

पूरा मामला एक सरकारी अस्पताल में कथित चिकित्सा लापरवाही से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि अस्पताल में उपचार के दौरान गंभीर स्तर की लापरवाही बरती गई, जिससे मरीज और उसके परिजनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

मामले के सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय लोगों ने भी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

रिकॉर्डिंग और वीडियो साक्ष्य होने का दावा

यूट्यूबर मयंक का दावा है कि उनके पास बातचीत की रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। उनका कहना है कि यदि जांच एजेंसियां चाहें तो वह पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध करा सकते हैं।


मयंक ने मांग की है कि इन रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बातचीत में क्या कहा गया और क्या वास्तव में किसी प्रकार का दबाव बनाया गया था।

निष्पक्ष जांच की उठी मांग

मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि दो

महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच आवश्यक है—
अस्पताल में कथित चिकित्सा लापरवाही हुई या नहीं।


वीडियो हटाने के लिए दबाव बनाए जाने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
नागरिकों का मानना है कि दोनों मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मामले के सामने आने के बाद अब लोगों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है।


वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो जांच रिपोर्ट के माध्यम से स्थिति स्पष्ट किए जाने की भी मांग उठ रही है।

संबंधित अधिकारियों का पक्ष आना बाकी

समाचार लिखे जाने तक संबंधित जिला चिकित्सा अधिकारी और आरोपों में नामित पक्षों का आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हो सका था। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा ताकि पाठकों के सामने मामले की पूरी तस्वीर आ सके।

जनहित और पारदर्शिता का मामला

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक अस्पताल या एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थानों की जवाबदेही, पत्रकारिता की स्वतंत्रता और जनहित से जुड़े मुद्दों को भी सामने लाता है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में किस प्रकार की जांच कराता है और क्या आरोपों की सत्यता सामने आ पाती है या नहीं। फिलहाल पूरे जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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