मनरेगा में बड़ा खेल? दुबेपुर में कागजों पर दौड़ रही मजदूरी, असली श्रमिक बोले— हमें तो काम ही नहीं मिला…..?

चकिया, चंदौली। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। चकिया विकासखंड के दुबेपुर गांव में ग्रामीणों ने योजना के संचालन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गांव में मनरेगा के कार्यों की जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंचती, जबकि कागजों पर हाजिरी भरकर भुगतान किए जाने की चर्चाएं पूरे क्षेत्र में हैं।

ग्रामीण मजदूरों का आरोप है कि जिन हाथों को मनरेगा से रोजगार मिलना चाहिए, वे आज भी दिहाड़ी की तलाश में गांव-गांव भटक रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें न तो किसी कार्यस्थल की सूचना दी जाती है और न ही काम पर बुलाया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि वास्तविक मजदूर काम पर नहीं हैं, तो सरकारी अभिलेखों में दर्ज मजदूरी किसके नाम से निकाली जा रही है?
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि गांव में पहले भी मनरेगा में फर्जी हाजिरी और अनियमितताओं के आरोप सामने आ चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हुई जिससे लोगों का भरोसा बहाल हो सके। इससे योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दुबेपुर गांव में मनरेगा के सभी कार्यों, मस्टर रोल, हाजिरी रजिस्टर और भुगतान का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि वास्तविक मजदूरों को उनका अधिकार मिल सके।
अब देखने वाली बात होगी कि ग्रामीणों द्वारा उठाए गए इन आरोपों पर संबंधित विभाग संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करता है और स्थिति स्पष्ट करता है या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा



