उत्तर प्रदेशचकियाचंदौली

गरला गांव मे मनरेगा में बड़ा खेल! कागजों पर 28 मजदूर,मौके पर सन्नाटा…….?

गरला ग्राम पंचायत में NMMS हाजिरी पर उठे गंभीर सवाल, ग्रामीणों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच

चकिया (चंदौली)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। चकिया ब्लॉक की गरला ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों में कथित फर्जी हाजिरी और कागजी मजदूरों का मामला सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज मजदूरों और धरातल पर दिखाई देने वाली वास्तविक स्थिति में भारी अंतर है।


जानकारी के अनुसार 7 जून 2026 को “प्राथमिक विद्यालय से जैन कुंथ तक पटरी मरम्मत कार्य” में ऑनलाइन पोर्टल पर 28 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई। NMMS ऐप पर समूह फोटो और जियो-टैगिंग भी अपलोड की गई है। लेकिन जब स्थानीय लोगों ने मौके का निरीक्षण किया तो वहां अपेक्षित संख्या में मजदूर नहीं मिले और कार्यस्थल पर सन्नाटा दिखाई दिया।


रोजगार गरीबों का, फायदा किसका?


ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के वास्तविक जरूरतमंद मजदूर रोजगार से वंचित हैं, जबकि कुछ लोगों के नाम पर घर बैठे हाजिरी और भुगतान का खेल चल रहा है। लोगों का कहना है कि कार्य शुरू होने की कोई सार्वजनिक सूचना नहीं दी गई, फिर भी बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होना संदेह पैदा करता है। तकनीक भी नहीं रोक पा रही फर्जीवाड़ा!


सरकार ने मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए NMMS ऐप, जियो-टैगिंग और ऑनलाइन हाजिरी जैसी व्यवस्थाएं लागू की थीं। लेकिन यदि डिजिटल रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में अंतर सामने आता है तो यह पूरे निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।


गरला गांव में उठ रही कार्रवाई की मांग…….।


ग्रामीणों ने बताया कि जल्द ही हस्ताक्षर अभियान चलाकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही मनरेगा कार्यों की जांच, फर्जी भुगतान की रिकवरी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी।


ग्रामीणों की मांग……।


कार्यस्थल का तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए।
NMMS ऐप की फोटो और वास्तविक मजदूरों का मिलान किया जाए।
हाजिरी, मस्टररोल और भुगतान अभिलेखों की जांच हो।
दोषी पाए जाने वालों पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
फर्जी भुगतान की वसूली सुनिश्चित की जाए।


बड़ा सवाल…….?


जब मनरेगा में भ्रष्टाचार रोकने के लिए डिजिटल निगरानी की मजबूत व्यवस्था लागू है, तो फिर बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामले किस ओर इशारा कर रहे हैं? क्या सरकारी धन की बंदरबांट के लिए तकनीक का भी दुरुपयोग किया जा रहा है?


गरला ग्राम पंचायत का यह मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। निष्पक्ष जांच होने पर मनरेगा की जमीनी हकीकत से जुड़े कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

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