बेसिक शिक्षा कार्यालय में लेट लतीफी! 10:40 बजे तक नहीं मिले बड़े बाबू, दो चपरासी आराम फरमाते मिले…?

चंदौली। जिले में परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति और अनुशासन को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग लगातार निर्देश देता है, लेकिन हर दिन को बेसिक शिक्षा कार्यालय में ही कुछ ऐसा नजारा सामने आया, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
बताया गया कि सुबह करीब 10 बजकर 40 मिनट तक बेसिक शिक्षा कार्यालय में बड़े बाबू समेत कई कर्मचारी अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। कार्यालय में मौजूद दो चपरासी भी कामकाज करते हुए नहीं, बल्कि आराम करते नजर आए। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, पूछने पर बताया गया कि अधिकारी प्रशिक्षण में गए हैं।
सवाल यह है कि जब जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के मुख्य कार्यालय में ही कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो दूर-दराज के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की समयबद्ध उपस्थिति कैसे सुनिश्चित होगी?
विद्यालयों में शिक्षक देर से पहुंचते हैं तो विभागीय अधिकारी निरीक्षण और कार्रवाई की बात करते हैं। लेकिन यदि विभाग के ही कार्यालय में कर्मचारी निर्धारित समय पर नहीं मिलें तो इस व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
“जैसा राजा, वैसी उसकी प्रजा” वाली कहावत यहां चरितार्थ होती नजर आ रही है। हालांकि कार्यालय में कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और उनके निर्धारित समय को लेकर विभागीय रिकॉर्ड अथवा उपस्थिति पंजिका से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अब देखना यह है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी चंदौली इस मामले को संज्ञान में लेकर कर्मचारियों की समयबद्ध उपस्थिति की जांच कराते हैं या फिर कार्यालय की यह लेट लतीफी यूं ही जारी रहती है।
बड़ा सवाल: जब विभाग के मुख्यालय में ही समय की पाबंदी नहीं होगी, तो विद्यालयों में शिक्षकों से समय पर पहुंचने की उम्मीद कैसे की जाएगी?
बीएसए पर उठे सवाल: फोन नहीं उठाने की शिकायतें भी आईं सामने
चंदौली। बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यप्रणाली को लेकर एक और गंभीर सवाल सामने आया है। आरोप है कि बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) से संपर्क करना भी आसान नहीं रह गया है।
बताया जा रहा है कि बार-बार फोन करने के बावजूद बीएसए फोन नहीं उठाते हैं। विभागीय जानकारी या किसी जरूरी कार्य के लिए संपर्क करने पर भी फोन रिसीव नहीं किया जाता।
पत्रकारों का कहना है कि जब मीडिया प्रतिनिधियों के फोन तक नहीं उठाए जा रहे हैं, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा, यह बड़ा सवाल है। डीएम के निर्देशों के बावजूद भी अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई बार पर्सनल नंबर और सीयूजी नंबर दोनों पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस रवैये से विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले को संज्ञान में लेकर स्थिति में सुधार कराते हैं या फिर यह समस्या यूं ही बनी रहती है।



